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Friday, September 23, 2011

Maaaaaaaaaa

अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

बस्ता  लादे जब घर आता 
बैठी चिंतित देहरी पर पाता 
स्नेह सघन नैनो का सारा 
उतर उतर अधरों पर आता 
आँचल की शीतल छाया में 
चंचल बचपन सुखदायी रहता  
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

माँ की थपकी लोरी के आगे 
वैभव कुबेर का फीका पड़ता
जब चाहा स्वर्ग भ्रमण करना  
सर माँ के गोद टिका पड़ता 
ममता निकर निकर उर से 
निरमल निर्झर नाईं बहता 
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

व्यवधानों का हर इलाज माँ  
आँचल से गठियाये रहती 
इसके   उसके का भेद नहीं 
सबको ही अपनाये रहती
आदेशों के प्रतिउत्तर में 
कभी न कोई नहीं कहता 
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

एक बार देखा था माँ को 
जब फूट फूट कर रो बैठी
विदा हुयी जब बेटी की डोली 
ज्यों मैंक मुक्त खो बैठी 
रुदन संग खुशियों का संगम 
क्षण प्रति क्षण होता ही रहता 
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

रिश्ते नातों का ख्याल बहुत 
पर कुछ का उसे मलाल  बहुत 
तिक्त रिक्त पर सच कह कर
उसने भोगे भी जंजाल बहुत
छोड़ा साथ स्वार्थवश उसने
बन कर जो परछाईं रहता
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

पछुआ सी बाहर भीतर डोले 
कभी न देख हाँथ झटकते 
करती बिकल हीन   हौले हौले  
कभी न देखा हाँथ झटकते 
पूरे घर की समाधान माँ 
मरहम कोई दवाई कहता
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

खेत और खलिहानों तक में  
द्वार और दालानों तक  में 
नजरें माँ की चौकस  रहती 
रहन  सहन परिधानों तक में 
कर्मठ माँ दण्डित भी करती 
जो छल और ढिठाई  करता
अम्मा , माता ,दाई कहता !

प्रथम कवंच माँ ही होती  
जीवन होम हेतु भी तत्पर 
यदि सम्मुख यम भी आ जाये 
माँ जूझे अंतिम तक डट कर 
संतति हेतु समर्पित ऐसे 
ज्यों कभी नहीं मृगरायी हटता 
अम्मा , माता ,दाई कहता !
दीदी , मैया , माई कहता  !

 
दीदी , मैया , माई कहता  !
 
 


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