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Saturday, August 27, 2011

Nktachini


                         राष्ट्रीय संकट
१- राष्ट्रीय संकट पर हमारे नेता एक हुआ करते हैं |
     वरना अलग -अलग श्रृंगालों सा हुआ-हुआ करते हैं |

                   बादल,बीबी और बॉस 
२- बादल ,बीबी और बास तीनो में अच्छी समानता है
     ये कब - कहाँ बरस जांए कौन जनता है  |
                     
                 थूंक कर चाटना             
३-पार्टी से निष्काशित नेता कहते  हैं
    राजनीति की खायी को
    बातचीत से पाटा जाता है
   आप कुछ भी कह लें 
   हम समझ गए थूंक कर कैसे चाटा जाता है|



kavita

दिल की बात कह दूँ नींद नहीं आती! 
विचारों  की आंधी 
भावना जग जाती 
लोगों को जगाने 
कुछ दूर कलम भागी 
स्वार्थ का बिछौना सोए हुए लोग
जगाता फिर कौन 
भ्रष्ट हुई व्यवस्था गूंजती न आह
सुनता फिर कौन
परिवर्तन की थाती, ले कविता कसमसाती 
दिल की बात कह दूँ  नीद नहीं  आती |

लाशों के ढेर पर कुर्सियां टिकीं  हैं 
टिकने की कीमत पर कुर्सियां बिकीं हैं 
सीमा की  चिंता में जाम तुम छलकाओ 
सेनानी की मौत पर आयोग तुम बिठाओ 
भूखों  से  रक्षित सीमा हो जाती है 
बलिदान का हुलास नहीं खींच क्षुधा लती है 
तिरंगे का कफ़न देख 
माँ दारुण विलाप कर दिगंत को गुंजाती
दिल की बात कह दूँ  नीद नहीं  आती |

जन्मो के बंधन का एहसास मन में पाती
चाहती न सुख केवल दुःख सारे सह जाती 
सिक्कों की  गिनती पर सांसे चल पातीं है 
लिप्सा की लपटों में संगनी जल जाती है 
जाने किस लालच में साथ छुट जाये 
किस भंवर बीच नैया जीवन की  डूब जाये 
डरता है मन बहुत छोटी सी बिटिया 
जब चढ़ गोद मुस्कुराती 
दिल की बात कह दूँ  नीद नहीं  आती |

मजदूरिन निराला की, गुलेरी का लहना हो 
है बात विश्वास की भारती का कहना हो 
सुभद्रा की मनु ,गुप्त  का वियोगी हो
साधना एकलव्य सी ,कृष्ण सा सहयोगी हो 
कैसा हो दीपदान पन्ना बतायेगी 
उर्मिला साकेत की न आंसू बहाएगी 
आदर्श के प्रतिमान ये ,चरित्र के चट्टान हैं 
पीढ़ी आज की ,इन्हे खोखला बताती | 
दिल की बात कह दूँ  नीद नहीं  आती |
दिल की बात कह दूँ  नीद नहीं  आती |





 

Friday, August 12, 2011

Nuktachini

1- व्यवस्था लोकतंत्र की बंधन नहीं अभिव्यक्ति पर ! 
     स्वतंत्रता का चित्र उभरता स्वायत्तता की भित्ति पर ! 
२- सेवा और शुल्क ! 
     सम्बन्ध समानुपाती ! 
३- जब से हम इक्कीसवीं सदी की ओर बढ़ने लगे हैं  ! 
     शरीर की भाषा अब नौनिहाल भी पढ़ने लगे हैं !
४- हिंदी विकास अधिकारी भली भांति कर्तव्य निभा रहे हैं! 
     अपने सभी बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ा रहे हैं !

Thursday, August 11, 2011

Nuktachini

१ -विदेश मंत्री ने कहा -
    विदेशों में हमारी हेठी न हुई होती
    हिंदुस्तान में गरीब न होते तो
    गरीबी कब की मिट गई होती !  
२- सत्ता और व्यभिचार के नायाब कड़ी हैं  !
     आप ने ठीक समझा मधुमिता -अमरमणि हैं !
३- पार्टी से निष्कासित नेता ने पुनः प्रवेश के प्रश्न पर कहा - 
     राजनीति की खाई को बातचीत से पाटा जाता है !        
     आप चाहे जो कहें , हम समझ गए थूंक कर कैसे चाटा जाता है !                                                                                                         

Nuktachini

                      ( १ )
  मंत्री जी ने जल संरक्षण पर कहा - 
  हमने पानी बहुत बचाया  है ! 
  एक बूंद भी व्यर्थ नहीं बहाया है ! 
  पानीसे नाता तोड़े वर्षों बीते हैं ! 
  रम,स्काच ,व्हिस्की के सिवा कुछ नहीं  पीते हैं!