दिल की बात कह दूँ नींद नहीं आती!
विचारों की आंधी
भावना जग जाती
लोगों को जगाने
कुछ दूर कलम भागी
स्वार्थ का बिछौना सोए हुए लोग
जगाता फिर कौन
भ्रष्ट हुई व्यवस्था गूंजती न आह
सुनता फिर कौन
परिवर्तन की थाती, ले कविता कसमसाती
दिल की बात कह दूँ नीद नहीं आती |
लाशों के ढेर पर कुर्सियां टिकीं हैं
टिकने की कीमत पर कुर्सियां बिकीं हैं
सीमा की चिंता में जाम तुम छलकाओ
सेनानी की मौत पर आयोग तुम बिठाओ
भूखों से रक्षित सीमा हो जाती है
बलिदान का हुलास नहीं खींच क्षुधा लती है
तिरंगे का कफ़न देख
माँ दारुण विलाप कर दिगंत को गुंजाती
दिल की बात कह दूँ नीद नहीं आती |
जन्मो के बंधन का एहसास मन में पाती
चाहती न सुख केवल दुःख सारे सह जाती
सिक्कों की गिनती पर सांसे चल पातीं है
लिप्सा की लपटों में संगनी जल जाती है
जाने किस लालच में साथ छुट जाये
किस भंवर बीच नैया जीवन की डूब जाये
डरता है मन बहुत छोटी सी बिटिया
जब चढ़ गोद मुस्कुराती
दिल की बात कह दूँ नीद नहीं आती |
मजदूरिन निराला की, गुलेरी का लहना हो
है बात विश्वास की भारती का कहना हो
सुभद्रा की मनु ,गुप्त का वियोगी हो
साधना एकलव्य सी ,कृष्ण सा सहयोगी हो
कैसा हो दीपदान पन्ना बतायेगी
उर्मिला साकेत की न आंसू बहाएगी
आदर्श के प्रतिमान ये ,चरित्र के चट्टान हैं
पीढ़ी आज की ,इन्हे खोखला बताती |
दिल की बात कह दूँ नीद नहीं आती |
दिल की बात कह दूँ नीद नहीं आती |
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